
महावीर स्वामीजी जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर हुए है जिनका जन्म 540 ई. पू. मे वैशाली के पास कुण्डग्राम (बिहार) में हुआ था। उन्होंने सत्य और स्वयं की रोज मे लगभग 30 वर्ष की आयु में अपना राजसी जीवन छोड़ गृह त्याग किया था। जैन धर्म मे इनसे पहले यानि 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ हुए थे। इनके अलावा भी अन्य प्रमुख तीर्थंकर हुए है जिनकी लिस्ट आपको नीचे देखने को मिल जाएगी। महावीर स्वामी की शिक्षाएँ जैन धर्म के लिए ही नहीं अपितु आज के हर नवजवान के लिए एक खास महत्व रखती हैं। स्वामीजी का मानना था कि प्रत्येक मनुष्य को क्रोध, लालच और नफरत छोड़ कर, एक सही जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। ऐसे करने से ही उसका उद्धार संभव है।
महावीर स्वामी पर 10 लाइन (10 Lines on Mahavira swami in Hindi)
- महावीर स्वामीजी जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर हुए है जिनका जन्म 540 ई. पू. मे वैशाली के पास कुण्डग्राम (बिहार) में हुआ था।
- जैन धर्म मे दूसरे तीर्थंकर अजितनाथ एवं तीसरे संभवनाथ हुए थे।
- स्वामी जी ने 30 वर्ष की आयु में अपना राजसी जीवन छोड़ गृह त्याग किया था।
- स्वामी महावीर की माता का नाम त्रिशला था एवं इनके पिता सिद्धार्थ थे।
- इनकी पत्नी का नाम यशोदा था एवं इनके एक पुत्री थी जिसका नाम प्रियदर्शना था।
- स्वामीजी को 12 साल तक कठिन तपस्या, ध्यान, उपवास और अनुशासन के साथ 42 वर्ष की आयु मे सच्चे ज्ञान का बोध हुआ।
- इनकी पुत्री प्रियदर्शना का विवाह जमाली/जामिल के साथ हुआ था।
- उन्होंने 5 महाव्रतों के साथ जीवन जीने का तरीका सिखाया जो है: अहिंसा (अहिंसा), सच्चाई (सत्य), चोरी न करना (अस्तेय), अनुशासित जीवन, (ब्रह्मचर्य), और अपरिग्रह।
- स्वामी जी के अनुसार हर मनुष्य को ये तीन रत्न हमेशा याद रखने चाहिए: सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक आचरण।
- स्वामी जी की मृत्यु पावापुरी बिहार मे 468 ई. पू. मे हुई थी।
जैन धर्म के प्रमुख तीर्थंकरो की लिस्ट
- पहले तीर्थंकर: ऋषभदेव (जिन्हे आदिनाथ की संज्ञा दी जाती है)
- दूसरे तीर्थंकर: अजितनाथ
- तीसरे तीर्थंकर: संभवनाथ
- सातवें तीर्थंकर: सुपार्श्वनाथ
- 16वें तीर्थंकर: शांतिनाथ
- 21वें तीर्थंकर: नेमिनाथ
- 22वें तीर्थंकर: अरिष्टनेमि
- 23वें तीर्थंकर: पार्श्वनाथ
- 24वें और अंतिम तीर्थंकर: महावीर स्वामी
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